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वो 1.30 मिनट! सांसत में रही जान, युवक को राैंदते रहे 5 सांड, दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया Tuesday 19 December 2023 04:54 AM UTC+00 मेड़ता शहर में सांडों के आतंक का एक और दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया। जिसमें एक युवक पर 5 सांडों ने हमला कर दिया। कुछ ही देर में कई सांड एकत्रित हो गए और 1.30 मिनट तक युवक को रौंदते रहे। युवक के दोस्त और मौके पर मौजूद लोग उसे बचाते रहे, लेकिन सांड वापस उसी युवक पर अटैक करते रहे। गनीमत रही कि 5 सांडों के हमले के बाद भी युवक बच गया।
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Rajasthan News: शाम को हंसते-खेलते सोए, सुबह उठ ही नहीं पाए, शादी की खुशियां गम में बदली Tuesday 19 December 2023 05:17 AM UTC+00 अक्सर ठंड बढऩे के साथ ही हार्ट अटैक के मामले बढऩे लगते हैं, लेकिन इस बार शहर में पिछले 15-20 दिन में हार्ट अटैक से हुई युवाओं की मौतों ने हर किसी को डरा दिया है। शाम को हंसते-खेलते सोए और सुबह पता चला कि हार्ट अटैक से मौत हो गई। दूसरे शब्दों में कहें तो उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिला। कुछ तो अस्पताल पहुंचने के बाद भी नहीं बच पाए।
हार्ट अटैक के लक्षण डॉक्टर से जानिए, हार्ट अटैक से कैसे बचा जा सकता है युवाओं में अचानक हार्ट अटैक बढऩे का कारण |
चुनाव में देसी की बढ़ी खपत, अंग्रेजी शराब व बीयर का घटा कारोबार Tuesday 19 December 2023 03:05 PM UTC+00 चुनाव में शराब की बात ना हो, ऐसा कैसे हो सकता है। लोग कहते भी हैं कि वोटों के लिए या तो शराब या फिर इसके लिए पैसे बांटे गए। चुनाव जीतने के लिए दारू/शराब बांटने का भरम इस बार कुछ टूट सा गया है। वो इसलिए भी कि चुनाव के तकरीबन डेढ़ महीने में शराब व बीयर की खपत ही घटकर रह गई। पिछले साल के मुकाबले इस बार चुनावी डेढ़ महीने में शराब व बीयर की खपत में करीब एक करोड़ 22 लाख रुपए की कमी आई है। सूत्रों के अनुसार चुनाव आचार संहिता लागू होने से चुनावी परिणाम आने (15 अक्टूबर से तीन दिसम्बर) यानी 48 दिन में शराब की बिक्री व उपयोग को लेकर जिलेभर का आकलन किया गया तो यह सच सामने आया। पिछले साल में इन्ही दिनों में पी गई शराब व बीयर इससे बहुत ज्यादा थी। आबकारी विभाग से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार इन 48 दिन में देसी मदिरा/ राजस्थान मेड लिकर (आरएमएल) की बिक्री जरूर पिछले साल के मुकाबले बढ़ी। पिछले साल इन दिनों में जहां 20 लाख 42 हजार 84 लीटर देसी/आरएमएल की बोतल बिकी तो इस बार इनकी संख्या 21 लाख 21 हजार 782 बोतल थी। पिछले साल 15 अक्टूबर से तीन दिसम्बर तक इनसे 16 करोड़ 68 लाख 59 हजार 164 रुपए आए तो इस बार यह राशि 17 करोड़ 5 लाख 70 हजार 969 रुपए रही। यानी केवल देसी/आरएमएल की बिक्री ही बढ़ी है। सबको पता ही है कि शराब महंगी होने के साथ सेहत के लिए हानिकारक भी है। इस सामाजिक बुराई को बंद करने की समय-समय पर मांग भी उठती रहती है। बावजूद इसके नागौर जिले में औसतन 35 हजार से अधिक बीयर रोजाना पी जा रही है। सेहत के लिए नुकसानदायक मानी जाने वाली शराब सरकार के लिए फायदे का सौदा बनती जा रही है। इसकी खपत भी बढ़ रही है और सरकार की आमदनी भी। चुनाव में अवैध शराब के कारोबार से मना नहीं किया जा सकता। एक ट्रक तो सदर थाना पुलिस ने पकड़ा था, जिसमें 75 लाख से अधिक की शराब थी। अंग्रेजी शराब और बीयर में पीछे आंकड़ों के हिसाब से इस साल चुनावी सीजन के 48 दिन में 5 लाख 48 हजार 525 बोतल अंग्रेजी शराब तो 14 लाख 85 हजार 593 बोतल बीयर बिकी। इसके बदले 23 करोड़ 15 लाख 88 हजार रुपए की आय हुई पर पिछले साल इन्हीं दिनों में अंग्रेजी शराब की 5 लाख 91 हजार 390 बोतल तो बीयर की 15 लाख 61 हजार 715 बोतल बिकीं। इसके बदले 41 करोड़ 29 लाख 11 हजार रुपए की कमाई हुई। यानी इस बार इन दिनों में चुनाव होने के बावजूद एक करोड़ 22 लाख रुपए कम की शराब बिकी। मतलब साफ है या तो चुनाव में शराब बांटी गई तो वो यहां से नहीं खरीदी गई या फिर चुनाव आचार संहिता की सख्ती के चलते शराब का उपयोग/दुरुपयोग हो ही नहीं सका। देसी के शौकीन ज्यादा सूत्रों का कहना है कि अंग्रेजी शराब के मुकाबले देसी मदिरा की खपत चौगुनी है। अकेले वर्ष 2020-21 में ही 82 लाख 92 हजार 900 लीटर देसी शराब बिकी तो वर्ष 2021-22 में तो देसी मदिरा इससे दस लाख अधिक लीटर बिकी। अंग्रेजी शराब की वर्ष 2020-21 में करीब अठारह लाख लीटर तो वर्ष 21-22 में करीब 23 लाख 64 हजार लीटर से अधिक की बिकवाली हुई। वर्ष 22-23 में यह आंकड़ा तीस लाख लीटर से अधिक था जो इस साल और बढ़ गया है। शुरुआती चार महीने में ही दो सौ करोड़ आधिकारिक रूप से तो डीडवाना-कुचामन जिला अभी अलग हुआ ही है। इसको मानते हुए नागौर जिले में अप्रेल से जुलाई तक दो सौ करोड़ रुपए तो यहां के शौकीनों ने शराब पर खर्च कर दिए, जिसमें करीब सौ करोड़ सरकार की जेब में गए। पिछले साल के मुकाबले इस शुरुआती चार महीने में साढ़े तीन लाख बीयर ज्यादा बिकी। अब तक करीब आठ महीने में आबकारी विभाग को छह सौ करोड़ से अधिक की आय हो चुकी है। हमेशा की तरह इस बार भी कहा गया था कि शराब चुनाव में खूब बंटी पर बंटी तो खरीदी कहां से? इनका कहना पिछले साल के मुकाबले करीब डेढ़ महीने में शराब की खरीद चुनाव के दौरान कम रही। करीब एक करोड ़22 लाख की शराब/बीयर कम थी, देसी की खपत इस बार ज्यादा थी। -मनोज बिस्सा, जिला आबकारी अधिकारी, नागौर। |
सरकारी विद्यालयों में संकाय तीन पर व्याख्याता एक भी नहीं Tuesday 19 December 2023 03:16 PM UTC+00 नागौर. सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़े तो आखिर कैसे? हालत यह है कि नागौर (कुचामन-डीडवाना) जिलेभर के तीन दर्जन से अधिक विद्यालयों में तो विज्ञान/वाणिज्य/कला संकाय के व्याख्याता ही नहीं हैं। एक-दो विषय व्याख्याता की कमी हो तो चल भी जाए, ऐसे-ऐसे भी विद्यालय हैं जहां विज्ञान संकाय तो हैं पर इससे जुड़ा एक भी व्याख्याता यहां नियुक्त नहीं है। ऐसे में कोई पेरेंट्स अपने बच्चों को क्यों सरकारी विद्यालय में दाखिल कराएगा। कई विद्यालय ऐसे हैं जहां संकाय तो तीन पर व्याख्याता इक्का-दुक्का है।सूत्रों के अनुसार सरकारी विद्यालयों के नामांकन बढ़ाने की सरकारी कवायद धरी रह गई। पत्रिका की पड़ताल में जो कुछ सामने आया वो कम गंभीर नहीं है। नागौर शहर के पास स्थित एक गांव के बारहवीं तक के विद्यालय में विज्ञान संकाय तो है, लेकिन पढ़ाने को एक भी व्याख्याता नहीं हैं। ऐसे में इस संकाय का कोई भी विद्यार्थी यहां प्रवेश क्यों लेगा? नतीजन इस स्कूल में ग्यारहवीं-बारहवीं कक्षा में नामांकन इस संकाय में बढ़ता कैसे? ये ही नहीं अकेले नागौर शहर में करीब आधा दर्जन विद्यालय ऐसे हैं जहां व्याख्याता नहीं व कम होने के कारण विद्यार्थी नहीं आ रहे। सूत्र बताते हैं कि शहर के बड़े कहलाने वाले नामी सरकारी विद्यालय की बात हो या फिर डीडवाना-कुचामन समेत अन्य शहर व कस्बों के स्कूलों की, व्याख्याताओं का टोटा बराबर बना हुआ है। नामांकन की कमी की समीक्षा करने पर यही बात सामने आई कि शिक्षकों की कमी के कारण बच्चे को पेरेंट्स स्कूल में दाखिला कैसे कराएं। यह तो कुछ नहीं मुख्य विषय अंग्रेजी/गणित विषय की पढ़ाई के लिए भी कई स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। गुहार बार-बार पर नतीजा शून्य सूत्रों का कहना है कि जिलेभर में करीब तीन हजार से अधिक सरकारी विद्यालय हैं, तीन दर्जन से अधिक विद्यालयों में तो व्याख्याता ही नहीं हैं। कहीं रसायन/जीव विज्ञान का व्याख्याता नहीं है तो कहीं गृह विज्ञान-भूगोल का, वाणिज्य संकाय का भी हाल लगभग ऐसा ही है। पूरे जिले में तकरीबन 42 विद्यालय ऐसे हैं जहां बड़ी संख्या में व्याख्याताओं की कमी है, इक्का-दुक्का हैं भी तो उससे कोई काम नहीं चल पा रहा। कई विद्यालयों में तो किसी संकाय का एक भी व्याख्याता नहीं है। ऐसे में ग्यारहवीं-बारहवीं कक्षा में नामांकन कैसे बढ़े। फ्लॉप-शो रहा प्रवेशोत्सव सरकारी विद्यालयों में करीब तीन महीने चला प्रवेशोत्सव फ्लॉप शो रहा। नागौर (डीडवाना-कुचामन) के सरकारी विद्यालयों के बच्चों की संख्या करीब पांच फीसदी कम हो गई है। यह तो तब जबकि इस बार ना तो सीबीइओ को कोई लक्ष्य मिला नहीं ही प्रधानाचार्य को। बार-बार नामांकन बढ़ाने को लेकर जरूर पत्र जारी होते रहे। पिछले साल की तुलना में करीब 22 हजार बच्चे कम हो गए हैं। ना कोई लक्ष्य ना कोई दबाव, उसके बाद भी सरकारी मशीनरी पूरी तरह स्कूलों का नामांकन बढ़ाने में जुटी रही, लेकिन लोगों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। इस नए सत्र में औसतन हर कक्षा में पिछले साल की तुलना में बच्चे कम हो गए। पिछले साल के मुकाबले 23 हजार कम सूत्रों के अनुसार पिछले साल यानी वर्ष 2022-23 में 3 हजार 27 विद्यालयों का कुल नामांकन तीन लाख 68 हजार 674 था जो इस बार वर्ष 2023-24 में करीब तीन लाख 45 हजार रह गया। यानी करीब पांच प्रतिशत कम। ग्यारहवीं-बारहवीं की कक्षा के छात्र-छात्रा तक पिछले साल के मुकाबले करीब तीन हजार बच्चे कम हैं।कयास लगाए जा रहे हैं कि नामांकन पिछले साल के अनुरूप तो नहीं हुआ, लेकिन ऐसा भी क्या कि नामांकन इतना कम हो गया? कहा तो यह भी जा रहा है कि इस बार अन्य कक्षाओं में से भी टीसी कटाने वाले विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा रही।उलझन में फंसा रहा प्रवेशोत्सव इस बार प्रवेशोत्सव ही उलझनभरा रहा। शिक्षकों ने पहले हाउस होल्ड सर्वे किया, परिणाम उत्साहजनक नहीं रहे। इस बार सीबीइओ अथवा किसी भी जिम्मेदारों को कोई टारगेट नहीं दिया। सीधा-सीधा हाउसहोल्ड सर्वे में चिह्नित बच्चों का नामांकन पहली प्राथमिकता रखी गई । सर्वे भी पहले एप के जरिए होना था, इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित भी किया गया , हालांकि हाउस होल्ड सर्वे ऑफ लाइन ही प्रारंभ हुआ। फिर नए आदेश के तहत शिक्षा से वंचित बच्चों को ऐप के माध्यम से दर्ज करने को कहा है। इनका कहना कुछ विद्यालयों में व्याख्याताओं की कमी है। नागौर शहर के ही करीब आधा दर्जन स्कूल इससे प्रभावित हैं। बार-बार मुख्यालय को इस बाबत बताया जाता है। संभवतया जल्द ही ये पद भर जाएंगे।-रामनिवास जांगिड़, कार्यवाहक सीडीइओ, नागौर। |
VIDEO...कैचमेंट एरिया में हुए पक्के निर्माणों ने प्रतापसागर तालाब को भी बना दिया पोखर Tuesday 19 December 2023 04:09 PM UTC+00 -तालाब आवक के रास्तों पर हुए निर्माणों ने रोका बारिश का पानी, अब बरसात का पानी तालाब तक नहीं पहुंच पाता, फिर भी प्रशासनिक अधिकारियों को पता नहीं कि तालाब का कैचमेंट एरिया हो गायब हो गया |
VIDEO...डबल इंजन की सरकार बनने के बाद रोडवेज में पदों का सूखा समाप्त होने की बढ़ी उम्मीदें Tuesday 19 December 2023 04:25 PM UTC+00 -खाली पदों के अभाव में रोडवेज की स्थिति हो रही खराब, चालन, परिचालन सहित विभिन्न शाखाओं में काम हुआ प्रभावित राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के 52 आगारों में इस समय नौ हजार से ज्यादा पद खाली चल रहे हैं। इसमें अधिकारिक वर्ग के करीब ढाई हजार, डेढ़ हजार से ज्यादा परिचालक एवं साढ़े तीन हजार से ज्यादा तकनीकी संवर्ग के पद खाली चल रहे हैं। इन खाली पदों की वजह से रोडवेज के आगारों की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सर्वाधिक खाली पद तकनीकी संवर्ग के हैंं। जानकारों के अनुसार तकनीकी संवर्ग के खाली पदों पर नियुक्तियां नहीं होने के कारण प्रदेश के डिपों की कार्यशाला में बसों की सार-संभाल तक नहीं हो पा रही। इसी तरह अन्य सवंर्गों में खाली पदों की वजह से निरीक्षण, बसों के संचालन आदि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। बताते हैं कि खाली पदों पर भर्तियां हुई तो तो फिर चालन, परिचालन, लेखा, कम्प्यूटर कार्य सहित यात्रियों को टिकट दिए जाने के कार्य गति आने के साथ ही बसों के रखरखाव व मरम्मत आदि की स्थिति सुधार होने से राजस्व में भी खासी बढ़ोत्तरी होगी। बसों के शिड्यूल तक निरस्त हो जाते हैं |
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