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गिरफ्तारी के बाद खातिरदारी करने की जिम्मेदारी भी आईओ की, खाना भी अपनी जेब से खिलाते Sunday 18 February 2024 04:28 PM UTC+00
सूत्रों के अनुसार एक तो सरकार की ओर से दी जाने वाली रकम पहले ही कम है और फिर उस पर तमाम बिल की औपचारिकता के झमेले में कोई पडऩा नहीं चाह रहा। लंबे समय से गिने-चुने आईओ ही बिल उठाने की मुश्किल सह पाए हैं। काफी अर्से से इसके लिए अलग से व्यवस्था या फिर डाइट का पैसा बढ़ाने की मांग चल रही है। बावजूद इस पर कुछ नहीं हो रहा। वर्तमान में अभी तीस-पैंतीस रुपए हर डाइट पर सरकार की ओर से दिए जा रहे हैं जबकि थाने की मैस पर ही यह खर्च करीब पचास रुपए पड़ता है। मजे की बात तो यह कि अधिकांश को तो यह भी नहीं मालूम कि सरकार प्रति डाइट का कितना देती है। एक उदाहरण के तौर पर देखें तो हाल ही में यश हत्याकाण्ड के मुख्य आरोपी रसूल मोहम्मद उर्फ बबलू घोसी करीब बारह दिन कोतवाली थाने में रिमाण्ड पर रहा तो इसी से जुड़े दूसरे मामले में आधा दर्जन आरोपी तीन-चार दिन थाने में रहे। ऐसे में इसी एक मामले में आईओ पर साठ-सत्तर डाइट का भार पड़ा। फिलहाल आईओ ने इस संदर्भ में बिल भी पेश नहीं किया है। ऐसा ही अन्य थानों में देखा जाता है, वो चाहें सदर हो या फिर मकराना अथवा मेड़ता। कर्ई थानों में मुश्किल ज्यादा जानकार सूत्रों के अनुसार श्रीबालाजी थाना, गच्छीपुरा, पांचौड़ी समेत कई थानों में मुश्किल कम नहीं है। यहां पुलिस की गिरफ्त में आने वाले आरोपी कम नहीं है, लेकिन कई बार मैस से भोजन इनको उपलब्ध नहीं करा पाते। भोजन बाहर के ढाबे/होटल से लाना पड़ता है जो आईओ की जेब पर भारी पड़ता है। और तो और वो बिल भी देगा तो मिलेगा खर्च के मुकाबले आधा ही। अलग-अलग राय इस संदर्भ में कई पुलिस अफसरों से बात की गई तो अलग-अलग राय सामने आई। एक अफसर का कहना था कि आईओ के भरोसे यह बंद होना चाहिए तब खाना मैस से ही आना है तो इसका सीधा बिल मैस के जरिए हो। एक एसआई बताते हैं कि छोटे-छोटे खर्च के लिए बिल की मैराथन कौन करना चाहेगा, इसके लिए थाने में महीने भर आए आरोपी पर हुए खाना खर्च का एक बिल अलग से पेश हो। एक हैड कांस्टेबल ने बताया कि आरोपी को खाने के साथ कई बार चाय-दवा आदि भी मुहैया करानी पड़ती है, अधिकतर आईओ के हिस्से यह खर्च आता है और इसका बिल लेने में सब कतराते हैं। |
VIDEO...रामदेव पशु मेला में इस वर्ष डेढ़ हजार पशु ज्यादा पहुंचे Sunday 18 February 2024 04:53 PM UTC+00 -अश्व वंश की भी हुई बेहतर आवक, दुकानों पर भी उमड़ रही भीड़ पिछले साल के मेला में इसलिए नहीं आए थे घोड़े |
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